🕉️ ६ माह का गणित ज्योतिष अध्ययन कार्यक्रम (Prarambhik Stara)

 


🌞 पहला माह — परिचय व आधारभूत ज्ञान

विषय: "ज्योतिष का ब्रह्मांड समझना"

अध्ययन विषय:

  1. ज्योतिष क्या है – इसके ६ अंग और उद्देश्य

  2. पंचांग के पाँच अंग – तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

  3. सौर व चन्द्र मास, संवत, और कालगणना

  4. राशिचक्र – १२ राशियाँ, २७ नक्षत्र, ४ पाद

  5. अयनांश (Ayanamsa) और लाहिरी पद्धति

व्यावहारिक अभ्यास:

  • प्रतिदिन पंचांग देखें और तिथि, नक्षत्र, वार लिखें।

  • कागज़ पर राशिचक्र का गोला बनाएं और राशियों को चिन्हित करें।

  • १२ राशियों और ९ ग्रहों के संस्कृत नाम याद करें।

पुस्तक अध्ययन:

  • बृहत् पराशर होरा शास्त्र – अध्याय 1–2

  • सूर्य सिद्धांत – अध्याय 1–2

  • पंचांग गणना – डॉ. बी.वी. रमन (प्रथम भाग)


🌗 दूसरा माह — समय और खगोल के आधार

विषय: "काल और अंतरिक्ष की माप"

अध्ययन विषय:

  1. समय की इकाइयाँ – मुहूर्त, घटी, कला, संवत, आदि

  2. स्थानीय समय (LMT), भारतीय समय (IST), सिदेरियल टाइम

  3. सूर्योदय-सूर्यास्त गणना (दृक पद्धति)

  4. देशांतर (Longitude) और अक्षांश (Latitude) का प्रभाव

  5. सूर्य व चंद्र की गति

अभ्यास:

  • अपने नगर का सूर्योदय समय पंचांग से मिलाकर निकालें।

  • JHora सॉफ्टवेयर में “Day-Hour Table” से तिथि परिवर्तन समय देखें।

पुस्तक:

  • सूर्य सिद्धांत अध्याय 3–4

  • बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 3–4


🪔 तीसरा माह — लग्न और भावचक्र (Bhachakra)

विषय: "कुंडली बनाना सीखना"

अध्ययन विषय:

  1. लग्न (Ascendant) की गणना – जन्म समय व स्थान से

  2. १२ भाव (Bhava) और उनके अर्थ

  3. भाव-मध्य व राशि भेद

  4. कुंडली के प्रकार – उत्तर, दक्षिण, व हीरे (डायमंड) शैली

  5. भाव शक्ति (Bhava Bala) की अवधारणा

अभ्यास:

  • स्वयं हाथ से तीन प्रकार की कुंडली बनाएं।

  • दिनभर में लग्न परिवर्तन का चार्ट बनाएं।

  • JHora में Chart Calculations सेक्शन देखें।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 5–6

  • सरावली का परिचय

  • ग्रह व भाव बल (बी.वी. रमन द्वारा)


🌠 चौथा माह — ग्रहों की गति (Graha Gati)

विषय: "ग्रहों का गमन और वेग"

अध्ययन विषय:

  1. ग्रहों का वर्गीकरण – ताराग्रह व छायाग्रह

  2. वक्री (Retrograde) व मार्गी ग्रह

  3. स्थिर ग्रह (Stationary) की भूमिका

  4. षड्बल (Shadbala) का परिचय

  5. उदय–अस्त और ग्रह वेग

अभ्यास:

  • २०२५ के ग्रहों के वक्री समय Drik Panchang से देखें।

  • वक्री और मार्गी कुंडली की तुलना करें।

  • सप्ताह के दिनों के ग्रह स्वामी नोट करें।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 7–9

  • फलदीपिका में ग्रह दृष्टि अध्याय

  • JHora → Planetary Positions Table


📅 पाँचवाँ माह — पंचांग का गहन अध्ययन

विषय: "समय के पाँच अंगों की गहराई"

अध्ययन विषय:

  1. तिथि – गणना, भद्रा, शुभ-अशुभ तिथियाँ

  2. नक्षत्र – २७ + अभिजीत, स्वामी, गुण

  3. योग, करण, वार – फल व प्रभाव

  4. मुहूर्त की प्रारंभिक समझ

  5. सूर्योदय आधारित तिथि परिवर्तन

अभ्यास:

  • प्रतिदिन पंचांग की ५ सूचनाएँ लिखें।

  • सप्ताह भर मनोभाव व नक्षत्र के संबंध का निरीक्षण करें।

  • एक छोटा पंचांग डायरी बनाएं।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 10–12

  • मुहूर्त चिंतामणि (प्रारंभिक भाग)

  • पंचांग गणना (उन्नत भाग)


🔭 छठा माह — अनुप्रयोग व फलित की झलक

विषय: "गणना से अर्थ की ओर"

अध्ययन विषय:

  1. गणित और फलित का संबंध

  2. ग्रह बल (Bala) का अर्थ

  3. लग्नेश, सूर्य, चंद्र का महत्व

  4. ग्रह दृष्टि और युति का प्रारंभिक ज्ञान

  5. जन्म कुंडली सत्यापन

अभ्यास:

  • अपनी जन्म कुंडली हाथ से बनाएं व सॉफ्टवेयर से मिलाएँ।

  • तिथि, नक्षत्र, योग की जांच करें।

  • हर ग्रह का एक-पृष्ठ नोटबुक सारांश बनाएं।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 13–15

  • फलदीपिका अध्याय 1–3

  • How to Judge a Horoscope (Vol 1) — बी.वी. रमन


📖 दैनिक अध्ययन दिनचर्या

कार्यसमयविवरण
सुबह10 मिनटदिन का पंचांग पढ़ें
अध्ययन30–45 मिनटएक विषय + चार्ट अभ्यास
अभ्यास15 मिनटसॉफ्टवेयर या हस्त-गणना
रविवारसाप्ताहिकस्वयं की परीक्षा या परिवार की कुंडली बनाना

🌺 ६ माह बाद आपकी योग्यता होगी —

✅ किसी भी पंचांग को पढ़ सकेंगे।
✅ अपनी या किसी की जन्म कुंडली हाथ से बना सकेंगे।✅ लग्न, भाव, राशि, नक्षत्र की गहरी समझ होगी।
✅ समझेंगे कि गणित ही फलित ज्योतिष की जड़ है।
 ✅ फलित ज्योतिष के अगले स्तर (दूसरा चरण) के लिए तैयार होंगे।

Author

Written by रविशंकर

रवि शंकर एक अनुभवी ब्लॉगर, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और ज्ञान साझा करने के प्रति समर्पित लेखक हैं। वे अपने ब्लॉग RaviPro.in के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, धर्म, आध्यात्मिकता और जीवन से जुड़े उपयोगी विषयों पर सरल और विश्वसनीय जानकारी साझा करते हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठकों को सही दिशा और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल सके। रवि शंकर को लेखन, रिसर्च और नई-नई जानकारियाँ सीखने व दूसरों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है। यह प्लेटफॉर्म केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाठकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रयास है। Website के माध्यम से वे अपने विचार, अनुभव और उपयोगी टिप्स नियमित रूप से साझा करते हैं।.

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