🪔 ६ माह का फलित ज्योतिष पाठ्यक्रम (Madhyam Stara – Predictive Level)

 


🌞 पहला माह — ग्रह और भावों का अर्थ

विषय: "ग्रहों की प्रकृति और भावों का जीवन से संबंध"

अध्ययन विषय:

  1. ९ ग्रहों का स्वभाव, गुण, मित्र–शत्रु संबंध

  2. १२ भाव (भावचक्र) – प्रत्येक भाव का जीवन में अर्थ

  3. भावेश (House lord) और भावफल

  4. ग्रह दृष्टि (Drishti) और युति (Conjunction) के फल

  5. लग्नेश, पंचमेश, नवमेश आदि की व्याख्या

अभ्यास:

  • अपनी कुंडली में प्रत्येक भाव का स्वामी लिखें।

  • देखें कौन-सा ग्रह किस भाव में स्थित है और उससे क्या फल निकलता है।

  • एक “ग्रह–भाव नोटबुक” तैयार करें।

पुस्तक अध्ययन:

  • बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 16–20

  • फलदीपिका अध्याय 4–6

  • सरावली भाव फल अध्याय


🌗 दूसरा माह — योगों का अध्ययन

विषय: "राजयोग, धनयोग, अरिष्टयोग आदि"

अध्ययन विषय:

  1. योग की परिभाषा – ग्रहों की विशेष स्थिति से उत्पन्न फल

  2. राजयोग, धनयोग, विपरीत राजयोग, गजकेसरी योग

  3. अरिष्ट योग (अशुभ योग) और उनके निवारण

  4. लग्नानुसार शुभ-अशुभ ग्रह

  5. ग्रह शक्ति और योग बल की गणना

अभ्यास:

  • अपनी व २ अन्य कुंडलियों में योग खोजें।

  • गजकेसरी योग और धनयोग की पहचान करें।

  • योगों का वास्तविक जीवन में परीक्षण करें।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 21–25

  • फलदीपिका अध्याय 7–9

  • जाटक पारिजात (चयनित योग अध्याय)


🌠 तीसरा माह — दशा प्रणाली (Dasha System)

विषय: "काल के अनुसार फल परिवर्तन"

अध्ययन विषय:

  1. दशा का अर्थ और उद्देश्य

  2. विम्शोत्तरी दशा – गणना और क्रम

  3. अन्तरदशा व प्रत्यंतरदशा

  4. दशा-फल निकालने की विधि

  5. ग्रह स्थिति के अनुसार दशा फल का विश्लेषण

अभ्यास:

  • JHora सॉफ्टवेयर में अपनी दशा सूची निकालें।

  • पिछले जीवन घटनाओं से मिलान करें (जैसे – नौकरी, विवाह, परीक्षा आदि)।

  • दशा परिवर्तन के साथ जीवन परिवर्तन को समझें।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 26–30

  • बी.वी. रमन – How to Judge a Horoscope (Vol. 2)


🪶 चौथा माह — गोचर (Transit) एवं ग्रहफल

विषय: "ग्रहों की चाल और उसके जीवन पर प्रभाव"

अध्ययन विषय:

  1. गोचर (Transit) का सिद्धांत

  2. गोचर का चन्द्र राशि और लग्न से विश्लेषण

  3. शनि, गुरु, राहु–केतु के गोचर के परिणाम

  4. गोचर + दशा का संयुक्त फल

  5. विशेष गोचर योग (साढ़े साती, गुरु बल, आदि)

अभ्यास:

  • वर्तमान वर्ष का अपना गोचर चार्ट देखें।

  • देखें कौन ग्रह शुभ/अशुभ स्थिति में है।

  • वास्तविक जीवन घटनाओं से तुलना करें।

पुस्तक:

  • गोचर फल — बी.वी. रमन

  • BPHS अध्याय 31–34


🌕 पाँचवाँ माह — भावों का गहन फल (House Results Deep Study)

विषय: "जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भावफल की पहचान"

अध्ययन विषय:

  1. प्रथम से द्वादश भाव तक फल

    • 1st: Personality

    • 2nd: Wealth

    • 3rd: Courage

    • 4th: Home, Mother

    • 5th: Children, Intellect

    • 6th: Enemies, Health

    • 7th: Marriage

    • 8th: Longevity

    • 9th: Luck, Religion

    • 10th: Career

    • 11th: Gains

    • 12th: Moksha

  2. भावेश और कारक ग्रहों का संयुक्त अध्ययन

  3. ग्रह–भाव संयोजन के सिद्धांत

अभ्यास:

  • ३–४ कुंडलियों का भावानुसार विश्लेषण करें।

  • विवाह, धन या शिक्षा सम्बन्धी भावों की तुलना करें।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 35–40

  • सरावली भावफल अध्याय

  • फलदीपिका भाव फल अध्याय


🔮 छठा माह — भविष्यवाणी और उपाय (Prediction & Remedies)

विषय: "गणना से सटीक फल और समाधान तक"

अध्ययन विषय:

  1. भविष्यवाणी की प्रक्रिया (Step-by-step analysis)

  2. दशा–गोचर संयुक्त विश्लेषण

  3. अरिष्ट निवारण उपाय – मंत्र, रत्न, दान, पूजा

  4. कर्म और भाग्य का संबंध

  5. अध्ययन सारांश और कुंडली अभ्यास

अभ्यास:

  • अपनी व परिवार की कुंडली का पूर्ण विश्लेषण करें।

  • दशा–गोचर जोड़कर घटना-सम्भावना लिखें।

  • ग्रह दोष के निवारण के उपाय नोट करें।

पुस्तक:

  • BPHS अध्याय 41–45

  • प्रश्न मार्ग (प्रारंभिक अध्ययन)

  • मंत्र महोदधि (उपाय हेतु संदर्भ)


📖 दैनिक अध्ययन दिनचर्या

कार्यसमयविवरण
सुबह15 मिनटपंचांग देखना व ग्रह स्थिति नोट करना
अध्ययन45–60 मिनटएक विषय व उदाहरण कुंडली
अभ्यास15–20 मिनटदशा–गोचर निरीक्षण
रविवारसप्ताह समीक्षाकिसी प्रसिद्ध व्यक्ति की कुंडली विश्लेषण

🌺 ६ माह के अंत तक आप सक्षम होंगे —

✅ किसी भी कुंडली का मूल फल बताने में।
✅ योग, दशा, गोचर से घटनाएँ निकालने में।
✅ ग्रह-भावों के शुभ-अशुभ फल बताने में।
✅ ग्रह दोष पहचानने और उपाय सुझाने में।
✅ “उत्तम स्तर (Acharya Jyotish)” के अध्ययन के लिए पूर्णतः तैयार रहेंगे।

Author

Written by रविशंकर

रवि शंकर एक अनुभवी ब्लॉगर, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और ज्ञान साझा करने के प्रति समर्पित लेखक हैं। वे अपने ब्लॉग RaviPro.in के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, धर्म, आध्यात्मिकता और जीवन से जुड़े उपयोगी विषयों पर सरल और विश्वसनीय जानकारी साझा करते हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठकों को सही दिशा और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल सके। रवि शंकर को लेखन, रिसर्च और नई-नई जानकारियाँ सीखने व दूसरों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है। यह प्लेटफॉर्म केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाठकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रयास है। Website के माध्यम से वे अपने विचार, अनुभव और उपयोगी टिप्स नियमित रूप से साझा करते हैं।.

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