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गोचर आधारित ट्रेडिंग (Transit-Based Trading) – ज्योतिष के आधार पर शेयर बाजार में निर्णय

 

प्रस्तावना

शेयर बाजार में सफलता पाने के लिए लोग टेक्निकल एनालिसिस, फंडामेंटल एनालिसिस और न्यूज़ आधारित रणनीतियों का उपयोग करते हैं। लेकिन एक विशेष पद्धति ऐसी भी है जो समय (Timing) को सबसे महत्वपूर्ण मानती है — गोचर आधारित ट्रेडिंग

गोचर (Transit) का अर्थ है – वर्तमान समय में ग्रहों की चाल और उनका जन्म कुंडली या देश/कंपनी की कुंडली पर प्रभाव। जब ग्रह अपनी स्थिति बदलते हैं, तो वे अलग-अलग राशियों और भावों पर प्रभाव डालते हैं, जिससे बाजार की मनोवृत्ति (Market Sentiment) प्रभावित होती है।

इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानेंगे:

  • गोचर आधारित ट्रेडिंग क्या है?

  • यह कैसे काम करती है?

  • किन ग्रहों का शेयर बाजार पर अधिक प्रभाव होता है?

  • एक सरल उदाहरण

  • सावधानियाँ और निष्कर्ष


1. गोचर क्या है?

वैदिक ज्योतिष में गोचर का अर्थ है – ग्रहों का वर्तमान आकाश में भ्रमण और उनका किसी कुंडली पर पड़ने वाला प्रभाव।

उदाहरण के लिए:

  • जब शनि राशि परिवर्तन करता है, तो वह लगभग 2.5 वर्ष तक एक राशि में रहता है।

  • बृहस्पति लगभग 1 वर्ष में राशि बदलता है।

  • मंगल का प्रभाव तेज और अचानक उतार-चढ़ाव ला सकता है।

इन्हीं ग्रहों की चाल को देखकर बाजार की दिशा का अनुमान लगाया जाता है।


2. गोचर आधारित ट्रेडिंग क्या है?

यह एक ऐसी ट्रेडिंग प्रणाली है जिसमें:

  • ग्रहों के गोचर को देखा जाता है

  • महत्वपूर्ण योग (जैसे गुरु-शनि युति, राहु-केतु परिवर्तन) का अध्ययन किया जाता है

  • देश की कुंडली या बाजार की स्थापना कुंडली का विश्लेषण किया जाता है

  • उसके अनुसार Buy/Sell का निर्णय लिया जाता है

इसे ज्योतिषीय टाइमिंग सिस्टम भी कहा जा सकता है।


3. शेयर बाजार में किन ग्रहों का प्रभाव अधिक माना जाता है?

(1) शनि – दीर्घकालीन ट्रेंड

  • मंदी या स्थिरता का संकेत

  • धीमी लेकिन मजबूत दिशा

  • बड़े करेक्शन का कारक

जब शनि अशुभ स्थिति में होता है, तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है।


(2) बृहस्पति – विस्तार और तेजी

  • तेजी का कारक

  • निवेशकों में विश्वास बढ़ाता है

  • नई ऊँचाइयों का संकेत

गुरु का शुभ गोचर अक्सर बुल रन (Bull Run) से जोड़ा जाता है।


(3) मंगल – अचानक उतार-चढ़ाव

  • वोलैटिलिटी बढ़ाता है

  • इंट्राडे ट्रेडिंग में प्रभावी

  • अचानक गिरावट या उछाल


4. गोचर आधारित ट्रेडिंग कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

स्टेप 1: बाजार या देश की कुंडली तैयार करें

भारत के संदर्भ में स्वतंत्रता समय की कुंडली ली जाती है।

स्टेप 2: वर्तमान गोचर देखें

किस ग्रह का किस भाव पर प्रभाव है?

स्टेप 3: दशा और गोचर मिलाएँ

यदि दशा और गोचर दोनों शुभ हों तो तेजी की संभावना।

स्टेप 4: टेक्निकल एनालिसिस से पुष्टि करें

सिर्फ ज्योतिष पर निर्भर न रहें।


5. एक सरल उदाहरण

मान लीजिए:

  • गुरु 11वें भाव में गोचर कर रहा है (लाभ का भाव)

  • शनि स्थिर स्थिति में है

  • राहु 5वें भाव में सट्टा प्रवृत्ति बढ़ा रहा है

तो:

  • मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी आ सकती है

  • ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ सकता है

लेकिन यदि मंगल 8वें भाव में हो तो अचानक गिरावट भी संभव है।


6. गोचर आधारित ट्रेडिंग के लाभ

✔ समय निर्धारण में सहायता
✔ लॉन्ग टर्म ट्रेंड पकड़ने में उपयोगी
✔ बाजार की मनोवृत्ति समझने में मदद


7. सावधानियाँ

⚠ केवल गोचर के आधार पर पैसा न लगाएँ
⚠ रिस्क मैनेजमेंट अनिवार्य है
⚠ स्टॉप लॉस अवश्य लगाएँ
⚠ भावनाओं में आकर ट्रेड न करें


8. निष्कर्ष

गोचर आधारित ट्रेडिंग एक उन्नत ज्योतिषीय प्रणाली है जो समय की शक्ति को समझकर बाजार में निर्णय लेने में सहायता करती है। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि एक विश्लेषणात्मक पद्धति है जिसमें ग्रहों की चाल और बाजार की चाल को जोड़कर देखा जाता है।

यदि इसे सही रिस्क मैनेजमेंट और टेक्निकल एनालिसिस के साथ मिलाकर उपयोग किया जाए, तो यह बेहतर टाइमिंग देने में सहायक हो सकती है।

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Written by Admin

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